Aabhar Tumhara by Meenu Tripathi

जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती तथा सामाजिक सरोकारों को परिलक्षित करती सात कहानियों को अपने में समाहित किए मीनू त्रिपाठी का चौथा कथा-संग्रह ‘आभार तुम्हारा’ पाठकों को साहित्य के नए धरातल से परिचित कराने में सक्षम है। सातों कहानियाँ मानव जीवन से जुड़ी क्लिष्टताओं, भावनात्मक-मानसिक द्वंद्वों तथा कालबाह्य सामाजिक मान्यताओं को न केवल उजागर करती हैं, अपितु पाठकों की आशा और अनुमान के विपरीत सर्वथा नई परिणति के दर्शन कराती हैं। समकालीन भाषा-शैली की प्रधानता की खदबदाहट के बीच पात्रों के अनुरूप देशज भाषा का तड़का पाठक की पठनीय भूख को आस्वादन से तृप्त करने में सक्षम है। सात मुक्तामणियों-सा सुशोभित सात कहानियों का मनोरंजक तथा पठनीय कहानी-संग्रह।

Aadhar : Aapki Pahchaan by Mahesh Dutt Sharma

देश भर में इन दिनों आधार कार्ड की बहुत चर्चा है। यह कार्ड आज भोजन की तरह हमारी अनिवार्यता बन गया है। आधार में महत्त्वपूर्ण क्या है? जवाब में आप कहेंगे—कार्ड। जी नहीं, कार्ड नहीं, इसकी बारह अंकोंवाली संख्या, जो अपने आप में एक यूनिक और स्थायी संख्या है। यह संख्या यूनिक इसलिए है, क्योंकि यह केवल आप ही को आवंटित की गई है, जिसके द्वारा दुनिया भर में कहीं से भी आपकी पहचान सुनिश्चित की जा सकती है। जैसा कि आपको पता ही है, आज बैंक एकाउंट, ड्राइविंग लाइसेंस, टिकट बुकिंग, गैस-सब्सिडी, पासपोर्ट सहित ज्यादातर सरकारी सुविधाओं के लिए आधार नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। इसे आसानी से नाममात्र का शुल्क देकर बनवाया और अपडेट कराया जा सकता है। आधार कार्ड की महत्ता और आवश्यकता को विस्तार से बताती पुस्तक, जो इसे बनवाने, अपडेट करवाने व व्यावहारिक उपयोग करने के तरीके सरल-सुबोध भाषा में आपको बताएगी।

Aadhi Dunia by Rashmi Gaur

आधी दुनिया प्रस्तुत कहानी-संग्रह की कहानियों में जीवन के विभिन्न रंग दृष्टिगत होते हैं। ‘आधी दुनिया’ में रत्ना की समाज-सेवा की लगन, एक मजबूर औरत की अरथी उठने का दर्द उन समाज-सेवी संस्थानों पर व्यंग्य है, जो एक विशेष आभिजात्य वर्ग की महिलाओं के लिए केवल फैशन परेड और विदेशों में घूमने का साधन बनी हुई हैं। जहाँ ‘कान खिंचाई’ में बच्चे बहादुरी का मीठा फल चख पाएँगे वहीं ‘लगन’ में विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य-प्राप्ति का संकल्प। ‘घोंसला’ में टूटते समाज में एकाकीपन का दर्द है तो ‘औलाद’ में अपने वतन में बसने की हौंस। इस प्रकार, नव रंगों में रची ये कहानियाँ अपनी कारुणिकता, मार्मिकता व रोचकता से पाठकों को एक नई दृष्टि देती हैं।

Aadidev Aarya Devata by Sandhya Jain

अंग्रेजी राज में अध्ययन की ऐसी शैली का सूत्रपात हुआ, जिसमें भारत की आदिवासी या जनजातीय जनसंख्या को आदिम सामाजिक समूहों के रूप में दिखाया गया, जो हिंदू समाज की मुख्यधारा से भिन्न और परे थी। अध्ययनकर्ता इस संस्थापित रूढि़वादिता पर संदेह कर रहे हैं, क्योंकि आध्यात्मिक-सांस्कृतिक परिदृश्य की सरसरी दृष्टि भी अत्यंत प्राचीन काल से जनजातियों और गैर-जनजातियों के बीच गहरे संबंधों की ओर इशारा करती है। दोनों समूह, जिन्हें एक-दूसरे से एकदम भिन्न बताया गया है, के बीच सक्रिय प्रभाव इस धारणा को चुनौती देता है। इसके अनुसार जनजातियाँ सुदूर जंगलों या पर्वत शृंखलाओं में रहती हैं। जनजातियों और ‘उच्च’ जातियों ने भारत की देशीय परंपराओं का समान रूप से सम्मान किया है और उसे सहेजा है, हालाँकि उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दाय के प्रति जनजातीय योगदान मुख्यतः अमान्य है। इस अध्ययन में प्रसिद्ध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों की खोजों को मिलाकर संयुक्त रूप से यह बताने का प्रयास किया है कि जनजातीय समाज हिंदू सभ्यता की कुंजी और आधार है।

Aadiwasi Aur Vikas Ka Bhadralok by Ashwini Kumar ‘Pankaj’

प्रभात खबर के अपने कॉलम ‘जंगल गाथा’ में हेरॉल्ड अपनी मृत्यु तक लिखता रहा। उसका आखिरी लेख उसकी मृत्यु के कुछ दिनों बाद छपा। ‘जंगल गाथा’ कॉलम में सामू ने झारखंड आंदोलन के बहाने संपूर्ण आदिवासी विश्व पर लिखा। ऐसा कोई भी आयाम उससे अछूता नहीं रहा, जिस पर उसने विचार-मंथन नहीं किया, कलम नहीं चलाई। चाहे वह फिलीपीन के आदिवासियों का संघर्ष हो या लातीन अमेरिकी आदिवासियों अथवा अमेरिकी रेड इंडियनों की लड़ाइयाँ—उसने देश के सुदूर दक्षिण पाल्लियार आदिम आदिवासियों की कथा लिखी, तो बस्तर और सोनभद्र की कहानियाँ भी लोगों तक पहुँचाईं। झारखंड उसके लेखन के मुख्य केंद्र में था ही। आदिवासी सवालों पर लिखते हुए सामू ने न सिर्फ भारतीय शासक वर्गों की मौजूदा नीतियों, कार्यक्रमों और विकासीय परियोजनाओं पर तीखे प्रहार किए और उनकी अमानवीय-अप्राकृतिक दोहन-मंशा को परत-दर-परत उधेड़ा, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से उस सांस्कृतिक-दार्शनिक द्वंद्व को भी रखा, जिसे आर्य-अनार्य संघर्ष के रूप में दुनिया जानती है। इस अर्थ में वह हिंदी का पहला आदिवासी सिद्धांतकार है, जिसने आदिवासियत के आलोक में, आदिवासी विश्वदृष्टि के नजरिए से पूँजीलोलुप समाज-सत्ता के दर्शन पर चोट की। उसने बताया कि यह व्यवस्था लुटेरी और हत्यारी है तथा यह आदिवासी क्या, किसी भी आम नागरिक को कोई बुनियादी सुविधा और मौलिक अधिकारों के उपभोग का स्वतंत्र अवसर नहीं देने जा रही, क्योंकि विकास की उनकी अवधारणा उसी नस्लीय, धार्मिक और सांस्कृतिक सोच की देन है, जिसमें आदिवासियों, स्त्रियों, दलितों और समाज के पिछड़े तबकों के लिए कभी कोई जगह नहीं रही है। —इसी पुस्तक से

Aahaar Chikitsa by Swami Akshey Atmanand

योग - जगत् ' के परम श्रद्धास्पद अधिकारी गुरु के रूप में प्रख्यात नाम है- स्वामी अक्षय आत्मानंदजी । स्वामीजी ने योगासन, प्राणायाम, अध्यात्म विज्ञान, सम्मोहन विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान आदि विषयों पर अत्यंत सरल -सुबोध भाषा एवं तार्किक शैली में अति रोचक अनेक ग्रंथों की रचना की है । स्वामीजी का साहित्य इतना सराहा गया है कि उनके ग्रंथों के कई - कई संस्करण हुए हैं । स्वामी अक्षय आत्मानंद योग एवं आहार संबंधी चिकित्सा को समर्पित एक ऐसे व्यक्‍त‌ित्व हैं, जिनकी पुस्तकें पाठक गण बड़ी श्रद्धा से पढ़ते हैं । उनकी पुस्तकों ने जहाँ स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान को सर्वसाधारण के लिए सहज-सुलभ बनाया है, वहीं पाठकों को गहरी अंतर्दृष्‍ट‌ि भी प्रदान की है । स्वामीजी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान पत्र द्वारा भी करते हैं । संपर्क सूत्र : स्वामी अक्षय आत्मानंद 38/15, जैन भवन, लखेरा, कटनी - 483504 ( म.प्र.)

Aaj Bhi Khare Hain Talab by  anupam Mishra

तालाब का लबालब भर जाना भी एक बड़ा उत्सव बन जाता । समाज के लिए इससे बड़ा और कौन सा प्रसंग होगा कि तालाब की अपरा चल निकलती है । भुज (कच्छ) के सबसे बड़े तालाब हमीरसर के घाट में बनी हाथी की एक मूर्ति अपरा चलने की सूचक है । जब जल इस मूर्ति को छू लेता तो पूरे शहर में खबर फैल जाती थी । शहर तालाब के घाटों पर आ जाता । कम पानी का इलाका इस घटना को एक त्योहार में बदल लेता । भुज के राजा घाट पर आते और पूरे शहर की उपस्थिति में तालाब की पूजा करते तथा पूरे भरे तालाब का आशीर्वाद लेकर लौटते । तालाब का पूरा भर जाना, सिर्फ एक घटना नहीं आनंद है, मंगल सूचक है, उत्सव है, महोत्सव है । वह प्रजा और राजा को घाट तक ले आता था । पानी की तस्करी? सारा इंतजाम हो जाए पर यदि पानी की तस्करी न रोकी जाए तो अच्छा खासा तालाब देखते-ही-देखते सूख जाता है । वर्षा में लबालब भरा, शरद में साफ-सुथरे नीले रंग में डूबा, शिशिर में शीतल हुआ, बसंत में झूमा और फिर ग्रीष्म में? तपता सूरज तालाब का सारा पानी खींच लेगा । शायद तालाब के प्रसंग में ही सूरज का एक विचित्र नाम ' अंबु तस्कर ' रखा गया है । तस्कर हो सूरज जैसा और आगर यानी खजाना बिना पहरे के खुला पड़ा हो तो चोरी होने में क्या देरी? सभी को पहले से पता रहता था, फिर भी नगर भर में ढिंढोरा पिटता था । राजा की तरफ से वर्ष के अंतिम दिन, फाल्‍गुन कृष्ण चौदस को नगर के सबसे बड़े तालाब घड़सीसर पर ल्हास खेलने का बुलावा है । उस दिन राजा, उनका पूरा परिवार, दरबार, सेना और पूरी प्रजा कुदाल, फावड़े, तगाड़‌ियाँ लेकर घड़सीसर पर जमा होती । राजा तालाब की मिट्टी काटकर पहली तगाड़ी भरता और उसे खुद उठाकर पाल पर डालता । बस गाजे- बाजे के साथ ल्हास शुरू । पूरी प्रजा का खाना-पीना दरबार की तरफ से होता । राजा और प्रजा सबके हाथ मिट्टी में सन जाते । राजा इतने तन्मय हो जाते कि उस दिन उनके कंधे से किसी का भी कंधा टकरा सकता था । जो दरबार में भी सुलभ नहीं, आज वही तालाब के दरवाजे पर मिट्टी ढो रहा है । राजा की सुरक्षा की व्यवस्था करने वाले उनके अंगरक्षक भी मिट्टी काट रहे हैं, मिट्टी डाल रहे हैं । उपेक्षा की इस आँधी में कई तालाब फिर भी खड़े हैं । देश भर में कोई आठ से दस लाख तालाब आज भी भर रहे हैं और वरुण देवता का प्रसाद सुपात्रों के साथ-साथ कुपात्रों में भी बाँट रहे हैं । उनकी मजबूत बनक इसका एक कारण है, पर एकमात्र कारण नहीं । तब तो मजबूत पत्थर के बने पुराने किले खँडहरों में नहीं बदलते । कई तरफ से टूट चुके समाज में तालाबों की स्मृति अभी भी शेष है । स्मृति की यह मजबूती पत्थर की मजबूती से ज्यादा मजबूत है । - इस पुस्तक से

Aaj Ki Baat Karen by Helle Helle

हेल्ले हेल्ले का जन्म 1965 में डेनमार्क के चौथे सबसे बड़े द्वीप लोलैंड के नगर नाकस्कॉव में हुआ था। उनका पालन-पोषण द्वीप लोलैंड के ही फेरी शहर रॉड्बी (Rødby) में हुआ था, जहाँ से नौकाएँ पुटगार्डन (जर्मनी) जाती हैं। साहित्य के प्रभाव में हेल्ले हेल्ले बचपन से थीं और अधिकांश समय पुस्तकालय में बिताती थीं। यह आभास उन्हें बहुत जल्दी ही हो गया था कि वह खुद भी एक लेखिका बनेंगी। रॉड्बी में करने के लिए बहुत कुछ नहीं था, इसलिए वे वयस्क होने पर कोपनहेगन शिफ्ट हो गईं। 1985 में उन्होंने कोपनहेगन विश्वविद्यालय में साहित्य अध्ययन में दाखिला लिया और एक लेखिका के रूप में उभरने लगीं। साहित्य में स्नातक करने के पश्चात् उन्होंने 1991 में राइटर्स स्कूल, कोपनहेगन से स्नातक किया। उनकी पहली पुस्तक वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई और तब से ही उनका लोकप्रिय लेखन प्रशंसा और आलोचना दोनों का एक चर्चित विषय रहा है। उन्होंने अभी तक कई कहानियों के अलावा वयस्क साहित्य पर 10 उपन्यास और बाल साहित्य पर एक पुस्तक लिखी है। हेल्ले हेल्ले अनेक साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित हुई हैं डेनिश क्रिटिक्स पुरस्कार, डेनिश अकादमी का बीट्राइस पुरस्कार, पी.ओ. एनक्विस्ट अवार्ड और डेनिश कला परिषद् का प्रतिष्ठित लाइफटाइम अवार्ड। उनकी कहानियों और उपन्यासों का 22 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उपन्यास Dette Burde Skrives I Nutid (...आज की बात करें) के लिए उनको प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार गोल्डन लौरेल से नवाजा गया है।

Aaj Ki Taaza Khabar by Rajendra Mohan Bhatnagar

आज की ताजा खबर—राजेंद्रमोहन भटनागर ये मेरी नहीं, हजारों हजार उन लोगों की कहानियाँ हैं, जिन्होंने इन कहानियों को जिया है, पर जो उन्हें लिख नहीं सके। इन कहानियों में अबूझे जन अपने को भूले-भटके तलाशते मन और उदासी में तल्लीनता ढूँढ़ते क्षण स्वयं से संवाद कर उठे हैं। वे रहें या न रहें, परंतु उनकी इन यादों में अकेली साँझ, मौन में सोई सुबह और पत्थर कूटती दोपहरी चुपचाप बतियाती, आपबीती सुनाती जब-तब जरूर दस्तक देती जान पड़ेगी। विलुप्‍त होती जा रही इनसानियत, रास्ता भटकी धूप-छाँव, वैश्‍विक समाज की छिन्न-भिन्न होती आवरण गाथा एवं उद्वेलित होती नृशंसता पुनः आत्म-चेतना की झिलमिल रोशनी में अपने आपको पहचानने की दावत देती है।

Aakarshan Ka Niyam by William Walker Atkinson

अपने आपको काम में व्यस्त कीजिए और अपने जीवन को एक स्वरूप दीजिए। यह मत सोचिए कि कुछ करने से पहले आपको ब्रह्मांड की तमाम पहेलियों को सुलझाना जरूरी है। उन पहेलियों की चिंता मत कीजिए और अपने सामने पड़े काम पर ध्यान दीजिए। अपने अंदर छिपे उस महान् जीवन-सिद्धांत को उसमें लगा दीजिए, जो प्रकट होने के लिए लालायित है। इस भ्रम में मत रहिए कि आपके शिक्षक या गुरु ने उस पहेली को सुलझा लिया है। यदि कोई उसे सुलझा लेने की बात करता है तो वह झूठ बोल रहा है और साहस बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। अबूझ पहेलियों और सिद्धांतों की चिंता मत कीजिए, काम कीजिए और जीना शुरू कीजिए। इन सिद्धांतों के बुलबुलों को फोड़ने का सबसे नायाब तरीका है—हँसना। हँसी एक ऐसी चीज है, जो हमें पागलपन से बचाती है। हास्य रस इनसान के लिए प्रभु का सर्वोत्तम उपहार है। चाँद बनना छोड़ दीजिए; प्रतिबिंब बनाना बंद कर दीजिए। काम करने के लिए सक्रिय हो जाइए और अपने आपको सूर्य बनाइए। यह आपकी शक्ति है। हर व्यक्ति के अंदर सूर्य बनने के गुण होते हैं। कार्य प्रारंभ कीजिए और खुद को प्रकट कीजिए। अपनी रीढ़ को मजबूत और सिर को ऊँचा कीजिए। —इसी पुस्तक से ——1—— अपने भीतर छिपी शक्ति और मानसिक दृढ़ता को पहचानकर सफलता के द्वार खोलनेवाली प्रेरक पुस्तक।

Aakash-Sanket by Manoj Das

आकाश-संकेत “चलिए, अब आप मुझे मेरे अगले सवाल का जवाब दीजिए। आपके बकरे का नाम क्या था?” “जी?” “देखिए, यहाँ जितने भाई खड़े हैं, उन सबने अपने-अपने पालतू जानवरों को कुछ-न-कुछ नाम दिया होगा। प्यारा-प्यारा नाम। है न? उदाहरण के तौर पर...” एक ग्रामीण, जो हर बात को मजाक में उड़ाने में माहिर था, झट से बोला, “मैं अपनी बिल्ली को ‘महारानी’ कहकर पुकारता हूँ और अपने बैल की जोड़ी को ‘दुधिया’ और ‘लकदक’!” “यह हुई न बात! अब छाकू भाई, तुम भी अपने प्यारे दिवंगत बकरे का नाम बताओ। यह तो बहुत बढ़िया होना चाहिए।” छाकू की गरदन लटक गई। “तुम इससे कितना प्यार कतरे थे—यह तो अब साफ हो ही गया है। दूसरे, क्या हमें यह बताने की कृपा करोगे कि कल तुमने अपने इस अति विशिष्‍ट बकरे को क्या खिलाया था?” छाकू के हाथ-पाँव फूले दिख हरे थे। “पनीर का केक? पुलाव? प्लेट भरकर रसगुल्ले? आखिरी चीज तुमने इसे क्या खिलाई थी? बताओ जरा?” भीड़ में खड़े कुछ ज्यादा होशियार लोगों को लगा कि इस बात पर थोड़ा हँस देना चाहिए और उन्होंने वैसा ही किया। —इसी उपन्यास से मनोज दास ऐसे लेखक हैं जो पाठक का मनोरंजन करते हुए उसे हँसा या रुला सकते हैं, प्रसन्न या उदास कर सकते हैं। ऐसी ही विशेषताओं से संपन्न प्रस्तुत उपन्यास ‘आकाश-संकेत’ वर्तमान समाज की विद्रूपताओं, उठा-पटक, आम आदमी की दयनीयता तथा सफेदपोश समाज के काले कारनामों का पर्दाफाश करता है।

Aakhiri Baazee by S. Hussain Zaidi

हर कहानी के दो पहलू होते हैं... मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमलों के ग्यारह साल बीत चुके थे, लेकिन उसके जख्म अब तक नहीं भरे थे। खास तौर पर पुलिस अधीक्षक विक्रांत सिंह के। आजकल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के साथ जुड़े, विक्रांत भारत के दौरे पर आए, पाकिस्तानी उच्चायुक्त जाकिर अब्दुल रऊफ खान से किसी तरह एक मुलाकात तय कर लेते हैं। जहाँ तक विक्रांत का दावा है, वह केवल खान से यह अपील करना चाहते हैं कि अपराधियों को पकड़ने की प्रक्रिया को तेज किया जाए, लेकिन मुलाकात का अंत उच्चायुक्त के मुँह पर पड़े एक मुक्के से होता है। इस बीच, भोपाल में, इंडियन मुजाहिदीन के पाँच सदस्य, जिन्हें विक्रांत ने मुंबई में आतंकवादी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, सेंट्रल जेल से भाग निकलते हैं। हाल ही में राजनयिक के साथ हुई झड़प के मामले में निलंबित विक्रांत से, भागे हुए आतंकियों का पता लगाने में, अनाधिकारिक रूप से मदद करने को कहा जाता है। देश के एक दूसरे हिस्से में, एक रिटायर्ड प्रोफेसर, टूटे दिल वाला एक पूर्व सैनिक और अपनी ही मुसीबतों से घिरी एक युवती अपने बारे में गहराई से सोचने के लिए मुंबई से लक्षद्वीप जा रहे एक क्रूज लाइनर पर एक यात्रा पर निकल पड़ते हैं। हालाँकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और क्रूज लाइनर को हाईजैक कर लिया जाता है। रहस्य, रोमांच, सस्पेंस, राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और ऐसे अनेक पहलूओं की अनूठा मिश्रण है यह पुस्तक जो पाठक को बाँधे रहेगी और फिल्म देखने का आनंद देगी। मसालेदार और दिलचस्प, हुसैन जैदी का जवाब नहीं।

Aakhiri Khwahish by Ajay K. Pandey

उसके पिता की हद से ज्यादा उम्मीदों ने हर विफलता के साथ उसके आत्मविश्वास को और भी डगमगा दिया। उसके जीवन में उसकी पत्नी उम्मीद की एक किरण लेकर आई, जिसका व्यक्तित्व इतना करिश्माई था कि वह जहाँ जाती खुशियाँ बिखेर देती थी। सबकुछ योजना के मुताबिक चल रहा था कि तभी अँधेरे ने दस्तक दे दी। उसे पता चला कि उसकी पत्नी चंद दिनों की ही मेहमान है और उसने ठान लिया कि वह सारी मुश्किलों से लड़ेगा—यहाँ तक कि अपने परिवार से भी, अगर इससे उसके इलाज में मदद मिल जाए। उसके पिता को लगता है कि उनकी मदद करने से वह भी अपने पाप से मुक्त हो जाएँगे। वैसे भी उन्हें मालूम है कि उनका बेटा इस जंग को तभी जीतेगा जब अपनी पत्नी के लिए, अपनी पत्नी के साथ मिलकर लड़ेगा। क्या एक हारा हुआ बेटा खुद को एक अच्छा पति साबित कर पाएगा? क्या पिता-पुत्र की जोड़ी किस्मत के लिखे को मिटा पाएगी? ‘आखिरी ख्वाहिश’ प्रेम, संबंधों और त्याग की एक प्रेरक कहानी है, जो एक बार फिर साबित करती है कि एक अच्छी पत्नी बहुत अच्छे पति को बनाती है। अजय के पांडे इससे पहले बेहद लोकप्रिय पुस्तक ‘यू आर द बेस्ट वाइफ’ लिख चुके हैं, जो उनके अपने जीवन की घटनाओं और दृष्टांतों पर आधारित है। इस पुस्तक ने न केवल कई दिलों को छू लिया है, और आज भी सर्वाधिक बिकनेवाली सूची में शामिल है।

Aalim Sir Ki English Class by Aalim

अंग्रेज़ी शब्दों के उच्चारण के मामले में आलिम सर एक जाना-माना नाम है। उनका कॉलम ‘ज़बान सँभाल के’ सन् 2004 में नवभारत टाइम्स, दिल्ली में प्रकाशित होना शुरू हुआ और बहुत जल्दी का़फी लोकप्रिय हो गया। उसके बाद पाठकों की माँग पर वह कई बार रिपीट भी हुआ। आलिम सर का अंग्रेज़ी पढ़ाने का ढंग निराला है। हल्के-फुल्के अंदाज़ में वह अंग्रेज़ी उच्चारण के जटिल-से-जटिल नियम चुटकी बजाते समझा देते हैं। उनका मानना है कि यदि पाठक अंग्रेज़ी उच्चारण के सात नियम समझ जाए तो वह 80 प्रतिशत अंग्रेज़ी शब्दों के उच्चारण का ़खुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं। हल्का-भारी का नियम उनकी अनोखी खोज है, जिसमें उन्होंने हिंदी व्याकरण के बहुत आसान से नियम के आधार पर अंग्रेज़ी उच्चारण का बेसिक ़फंडा समझाया है। हिंदी के पाठकों के लिए यह बहुत उपयोगी साबित हुआ है। इस पुस्तक में आलिम सर ने अपनी पुरानी क्लासों को संशोधित-संवर्धित रूप में प्रस्तुत किया है। हर क्लास के अंत में उसका सार और अभ्यास भी जोड़ा गया है, जो कि अ़खबार में छपे कॉलम में नहीं था। अंग्रेज़ी भाषा को सहज-सरल ढंग से सीखने में सहायक एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक।

Aam Aadmi Aur Loktantra by B S Shekhawat

आम आदमी और लोकतंत्र अब हमें यह भी जान लेना चाहिए कि लोकतंत्र का पाँचवाँ स्तंभ भी है, जिसे गरीब आदमी कहा जाता है। यह स्तंभ ऐसा शक्‍तिशाली स्तंभ है, जो सत्ता को बदल डालता है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि चुनाव में विजय और पराजय यह सब तो चलता रहता है। कुछ कहते हैं, हम काम तो बहुत करते हैं, पर फिर भी हार जाते हैं। लेकिन उनके पराजित होने का कारण ही यही है कि जनता में एक वर्ग ऐसा है, जो यह मानता है कि यदि उसे प्रत्यक्ष में कोई लाभ होगा, उसकी गरीबी मिटेगी तभी उसे विश्‍वास होगा कि लोकतंत्र क्या है, कानून क्या है और प्रशासन क्या है। वह केवल भाषण से संतुष्‍ट नहीं होनेवाला है। वह संतुष्‍ट तभी होगा जब उसके पेट में प्रतिदिन आराम से दो रोटी पहुँच सकेगी। यदि वह संतुष्‍ट नहीं होगा तो असंतोष बढ़ेगा और यदि असंतोष बढ़ेगा तो लोकतंत्र के प्रति उसकी जो आस्था है, उसमें शनै:-शनै: कमी आती जाएगी—और जिस दिन ऐसे लोगों का संगठन बन गया तो कैसी स्थिति पैदा होगी, उसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता है। —इसी पुस्तक से

Aana Mere Ghar by Tulsi Devi Tiwari

अरे ! ये क्या हुआ?'' “क्या हुआ सोना-मोना को ? ये खून से लथ-पथ कैसे हो गईं?'' पापा-मम्मी सिर पटक-पटककर रो रहे हैं। अपनी पोतियों के लिए। हमारा तो वंशनाश हो गया भगवान् ! हमारी बहू अब कभी माँ नहीं बन सकती। सोचा था, दोनों पोतियों को देखकर जी लेंगे, सत्यानाश हो उस ट्रक वाले का, जिसने इनकी ऑटो को टक्कर मार दी। अब हम क्या करें भगवान्, किसके सहारे जिएँ?'' मम्मी को रोते उसने पहली बार देखा था। | बड़ी कड़क औरत हैं, आँसुओं की इतनी मजाल कहाँ कि उनकी पलकों की देहरी लाँघ जाएँ। वह रोना चाहती थी अपनी सोना-मोना के लिए, किंतु कंठ से आवाज । नहीं निकल रही थी। उसने पूरा जोर लगाया “हाय मेरी बच्चियाँऽ! अब मैं किसके लिए जिऊँगी? मुझे उठा ले भगवान् !'' उसने अपने हाथों से कसकर अपना गला दबाने का प्रयास किया। किंतु कुछ न हो सका।“सोना-मोना के लिए तो इतना रो रही है और जिसे गर्भ में ही मार दिया उसका क्या ? ले भोग बेटी को मारने की सजा। अब इस जन्म में तुझे कोई माँ नहीं कहेगा।'' एक पहचानी सी आवाज गूंजी थी उसके कानों में, “हाँ! मैंने पाप तो बहुत बड़ा किया, परंतु इसमें इनका क्या दोष? मुझे क्षमा कर दो, हे ईश्वर ! मेरी सोना-मोना को मेरे पापों की सजा मत दो, उन्हें जीवनदान दे दो!'' -इसी संग्रह से बदलते भारतीय समाज में पैदा हो रही नई चुनौतियों और विसंगतियों को पुरजोर ढंग से उठाकर उनका समाधान बतानेवाली प्रेरक, मनोरंजक एवं उद्वेलित कर देनेवाली पठनीय कहानियाँ

Aangan Ki Gauraiya by Mukti Shahdeo

आज बचपन के गलियारे में झाँकती हुई ठीक-ठीक जान पाती हूँ कि मार खाकर घंटों रोनेवाली वह लापरवाह लड़की हर वक्त जिस सपनीली दुनिया में जीती थी, वहाँ की एकमात्र सहचरी बहुत सालों तक घर-आँगन में फुदकने वाली गौरैया ही थी। जीवन की कठिन या क्रूरतम सच्चाइयाँ हमें तोड़ती-मरोड़ती हैं और बदल देती हैं। बाहर की दुनिया में हम सामान्य बने रहकर चलते रहते हैं। आज सोचती हूँ, ठीक इसी टूटन के समानांतर जीवन की ये सच्चाइयाँ हमें बहुत ही पुख्ता डोर से बाँधती, जोड़ती और बनाती भी रहती हैं, एकदम परिपक्व। अचानक ऐसी ही परिस्थितियों के बीच मैंने खुद को लापरवाही की दुनिया से अलग जिम्मेदारी से भरपूर सख्त जमीन पर खड़ा पाया। बाहर की यात्रा निस्संदेह बहुत कठिन थी, पर भीतर जो यात्रा चल रही थी, वह बहुत सुकून देने वाली थी। मनचाहे रंगों से सजाकर मैंने उस भीतरी यात्रा को भरपूर जीना, किशोरावस्था में ही सीख लिया था, जो आज भी कायम है। जब भी बाहर की ऊबड़-खाबड़ परिस्थितियों से कदम लड़खड़ाते, अंदर स्वतः प्रवहमान शब्द मेरी गलबहियाँ थामे रहते। —इसी पुस्तक से

Aankhan Dekhi Bihar Andolan by Bajrang Singh

आँखन देखी : बिहार आंदोलन एक आंदोलन दूसरे आंदोलन की याद दिलाता है। हाल के भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन के कारण 1974 के बिहार (जेपी) आंदोलन की खूब चर्चा हुई है। 1974 के दशक में या उसके बाद की जनमी नई पीढ़ी 1974 के आंदोलन के बारे में जानना-समझना चाहती है, लेकिन उसके लिए पर्याप्‍त सामग्री की कमी है। हाल में दिल्ली के नृशंस गैंप रेप के विरोध में दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में स्वतःस्फूर्त जन विस्फोट हुआ। बिहार आंदोलन के बाद पहली बार सामाजिक सरोकार के सवाल पर देश के छात्र-छात्राओं की इतनी बड़ी शक्‍ति दिल्ली के राजपथ (जिन पर आंदोलनात्मक गतिविधियाँ प्रतिबंधित रही हैं) पर अपनी आवाज बुलंद कर रही थी। क्या भारत की यह युवा शक्‍ति इस पुरुष-प्रधान समाज एवं पूँजीवादी व्यवस्था की गैर-बराबरी, अन्याय एवं अत्याचार को खत्म करने तथा समतामूलक लोकतांत्रिक समाज की स्थापना करने की दिशा में पहल कर पाएगी? प्रस्तुत पुस्तक बिहार आंदोलन की व्यापकता और उसमें बुनियादी परिवर्तन और क्रांति के बीज होने की क्षमता का आँखों देखा प्रामाणिक विवरण पेश करती है। एक पत्रिका में छपे लेखों, रपटों और दस्तावेजों के माध्यम से किसी आंदोलन पर ऐसी पुस्तक शायद ही हिंदी में कोई दूसरी हो। बिहार की संघर्षशीलता, जुझारूपन और आंदोलन-शक्‍ति को समझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।

Aankhon Ki Dekhbhal by R K Kapoor

प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ डॉ. आर.के. कपूर द्वारा रचित पुस्तक ‘आँखों की देखभाल’ में वैज्ञानिक आधार पर आँखों से संबंधित महत्त्वपूर्ण रोगों का वर्णन किया गया है। साथ ही रोजमर्रा में की जानेवाली आँखों की देखभाल से संबंधित दिशा-निर्देश देकर ऐसे रोगों से बचने के उपाय भी बताए गए हैं। यह पुस्तक देखभाल, निवारण तथा उपचार के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। इस पुस्तक में विशेष रूप से चश्मा लगाने, निकट दृष्टि-दोष, भेंगापन एवं संक्रामक रोगों के बारे में फैली गलत धारणाओं और भय को उजागर किया गया है। लेखक ने आँखों की देखभाल के लिए पाठकों के समक्ष व्यावहारिक जानकारी रोचक ढंग से प्रस्तुत की है। इसके अलावा रोगों पर काबू पाने तथा नेत्र विशेषज्ञों की सेवा का भरपूर लाभ उठाने की जानकारी दी गई है। इस पुस्तक में योग, प्राणायाम तथा प्रातःकालीन सैर की महत्ता पर बल दिया गया है, ताकि हमारी आँखों को बराबर ऊर्जा एवं शक्ति मिलती रहे। अत्यंत रोचक, जानकारीपरक एवं उपयोगी पुस्तक।

Aao Bachcho Avishkarak Banen by Dr Apj Abdul Kalam

महान् वैज्ञानिकों का मस्तिष्क प्रश्नों से भरा होने के कारण सदैव अशांत रहता है। वे किसी भी बात के लिए पूछते हैं कि ऐसा क्यों होता है? क्या मैं इससे बेहतर कर सकता हूँ? या इससे बेहतर क्या हो सकता है? वे प्रश्नों से लबालब भरे होते हैं, कभी-कभी वे अपने प्रश्नों से दूसरों को भी नाराज कर देते हैं। प्यारे बच्चो, क्या तुम अनुमान लगा सकते हो कि अलेक्जेंडर ग्राहम बेल का सबसे अधिक लोकप्रिय छात्र कौन था? वह हेलेन कीलर थी, जो दृष्टिहीन तथा बधिर होने के साथ-साथ एक महान् लेखिका, समाजसेविका तथा कवयित्री थीं। महान् वैज्ञानिक छोटी-से-छोटी घटनाओं से भी अत्यधिक प्रेरित होते हैं। वे असफलता को सफलता प्राप्ति की एक सीढ़ी के रूप में प्रयोग कर लेते हैं। युवाशक्ति के प्रेरणास्रोत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का आपसे आग्रह है कि अपना छोटा सा लक्ष्य चुनें, अपने भीतर एक नई ऊर्जा का संचार करें और एक ऊँची उड़ान भरने के लिए उद्यत हो जाएँ। यह पुस्तक छात्रों-युवाओं में कुछ नया करने की प्रेरणा देती है, ताकि नवाचार और आविष्कार कर हम समाज को बेहतर बनाने में कुछ योगदान दे सकें।

Aao Badlein Tasveer by Anita Prabhakar

कहानी में प्रायः किसीनकिसी रूप में समाज और मानवीय चिंताओं एवं सरोकारों का लेखाजोखा रहता है। कहानी मन की गहराइयों और स्वयं को समझने का माध्यम बनती है, तो साथ ही एक अनोखी, अनकही एवं अनछुई झटपटाहट की अभिव्यक्ति को भी स्वर देती है। कहानी अपने तेवर और कलेवर में जिन तथ्यों तथा कथ्य को उघाड़ती, पछाड़ती एवं समेटती चलती है, वह सत्य से भी अधिक सत्य होते हैं। अतः सृजनधर्मिता से गुजरी हुई हर कहानी जीवन की हर संभावना में हस्तक्षेप कर जीवन को सँवारती है, जीवन को रचती है और उसे नया रूप देती है। अनीता प्रभाकर समाज में सदियों से पसरी पितृसत्तात्मक प्रवृत्तियों के चलते औरत के प्रति शोषण, उपेक्षा, उत्पीड़न, अत्याचार को रेखांकित करते हुए उसके विरुद्ध प्रतिरोधात्मक स्वरूप का संघर्ष करने के लिए उसे आगे बढ़ाती हैं। एक ओर कामकाजी औरतों की बढ़ती संख्या के कारण उनकी बढ़ती जिम्मेदारियाँ हैं, तो दूसरी ओर पितृसत्ता के परंपरागत षड्यंत्रों के बदलते रूपों के प्रति उनमें सजगता आई है और वे उसके विरुद्ध विद्रोह करती दिखाई देती हैं। इन कहानियों का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि इनमें पुरुष में भी परिवर्तन आता दिखाई देता है। इस तरह लेखिका का मानव की संवेदना और मार्मिकता में अटूट विश्वास दिखाई देता है। पठनीयता एवं रोचकता से भरपूर हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह।

Aao Dhanvan Banen by Radha Raman Mishra

बचत और निवेश को लेकर हम प्रायः ऊहापोह में रहते हैं। कहाँ निवेश करें? पैसा है नहीं, कैसे बचत करें? क्या पी.पी.एफ. ठीक है या फिर सुकन्या समृद्धि योजना अथवा म्यूचुअल फंड? कहाँ लगाएँ पैसा? म्यूचुअल फंड में कैसे करें निवेश? किस कंपनी का शेयर लेना ठीक है? शेयर में निवेश करते समय कौन-कौन सी बातों को ध्यान में रखना चाहिए? क्या शेयर लेते समय सस्ता-महँगा पर गौर करना चाहिए? एन.पी.एस. खाता कहाँ खोलें? रिटायरमेंट की योजना कैसे बनाएँ? मकान कब खरीदना बेहतर होगा? बैंक व बीमा कंपनियों में होनेवाली समस्याओं की कहाँ करें शिकायत? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका हम सभी को सामना करना पड़ता है। यह पुस्तक इन तमाम प्रश्नों का उत्तर तलाशने का एक प्रयास है। इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आप निवेश करते समय बाजार में उपलब्ध तमाम वित्तीय उत्पादों की खूबियों-खामियों को समझते हुए कदम बढ़ाएँ। साथ ही आप नौकरी में बतौर कर्मचारी अपने लाभ और अधिकारों को जानें। बैंक, बीमा और म्यूचुअल फंड में बतौर ग्राहक अपने अधिकारों को समझें और जरूरत पड़ने पर अपनी समस्याओं तथा शिकायतों को उचित मंच पर लेकर जाएँ। कुल मिलाकर यह पुस्तक आपको वित्तीय मामलों में शिक्षित बनाने की एक छोटी सी कोशिश है।

Aao Karein Himalaya Me Tracking by Girish Chandra Maithani

आओ करें हिमालय में ट्रैकिंग-‌ग‌िरीश चंद्र मैठाणी यात्राशास्‍‍त्र पर वैसे अब तक बहुत लिखा गया है, पर ट्रैकिंग पर यह कृति अद्वितीय है। अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसी दुर्गम यात्राओं पर निकल पड़ना कम जीवट का काम नहीं। प्रस्तुत पुस्तक में अनेक लोमहर्षक पद-यात्राओं का वर्णन है। ‘आदि कैलास-ओम् पर्वत ट्रैक’, ‘डोडीताल ट्रैक’, ‘काक भुशुंडिताल ट्रैक’, ‘काफनी-प‌िंडारी-सुंदरडुंगा ट्रैक’ आदि अनेक अनुभव पाठक को रोमांचित करते हैं। यह कार्य सबसे कठिन है। पर अब ट्रैकिंग या पर्वतारोहण की परंपरा धीरे-धीरे बढ़ रही है, इस दृष्‍टि से यह पुस्तक बहुत कुछ अनुभवों और अनुभूतियों के द्वार खोलती है। यह नई चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है। नए लोगों के लिए ट्रैकिंग के अनेक सुझावों से पुस्तक की उपयोगिता और भी बढ़ गई है। निस्देंह हिंदी साहित्य में यह कृति एक बहुत बड़े अभाव की पूर्ति भी करेगी। जो जातियाँ खतरा उठाना जानती हैं, वे ही संसार में कुछ नया रचने में सफल होती हैं। नई पीढ़ी नई चुनौतियों के साथ आगे बढ़ रही है। हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करानेवाले नवयुवक एवं नवयुवतियाँ उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। आज आवश्यकता है उन्हें प्रेरित करने के लिए ऐसे प्रयासों की। आशा है, यह पुस्तक नई पीढ़ी को ही नहीं, अन्य लोगों को भी प्रभावित एवं प्रेरित करेगी।

Aao Priye, Madhuchandr Ke Liye by Nagathihalli Chandrashekhar

रोहतांग पास में बहुत ऊँचाई तक उसे लेकर गया था। मैं अच्छी तरह जानता था कि प्रीति की इन सबमें कोई रुचि नहीं। उसने सिटी बस ड्राइवर राजा का साथ चाहा था। राजा के बाहु, उसकी जाँघें उसे चाहिए, यह मैं जानता था। उसे बार-बार विश्वास दिलाकर आगे, और आगे लेकर गया। उसके साथ एक नया खेल रचा; ‘दूर घाटी के जल-प्रपातों को जरा गिनो तो देखूँ’, कहकर एक नया खेल रचा। वास्तव में वहाँ जल-प्रपात नहीं थे। वह और भी आगे जाकर देखने लगी। मैं अपना हाथ और भी आगे बढ़ाकर उसे विश्वास दिलाते हुए ‘दुबारा गिन’ कहते हुए उसे किनारे तक बुला लाया। वह तन्मयता से खड़ी होकर जल-प्रपातों को ढूँढ़ने गई और तभी मैंने उसे जोर से ढकेल दिया। महीन पत्थरों पर खड़ी वह संतुलन खो कर फिसल गई, घाटी में चार सौ मीटर नीचे गिर पड़ी, फिर मैं ही चीख पड़ा, चिल्लाया—‘आओ प्रिया, पे्रम यात्रा पर निकल चलें!’ यह उपन्यास एक सच्ची घटना पर केंद्रित है। मैसूर केएक नव-विवाहित प्रेमी युगल को पात्र बनाकर रची इस कथा केआधार पर करीब आज से 35 वर्ष पूर्व बनी कन्नड़ फिल्म दर्शकों का आकर्षण और प्रेमादर प्राप्त कर कई संस्करणों में छपी और पाठकों के बीच खूब लोकप्रिय हुई। प्रेम और अपनत्व के साथ ही घृणा और प्रतिशोध की ज्वाला से धधकता एक पठनीय मर्मस्पर्शी उपन्यास।

Aao, Magic Tricks Seekhen by Nakul Shenoy

जादू यकीन दिलाने की योग्यता है। यह प्रदर्शन की कला है। आप अपने दर्शकों को बेवकूफ नहीं बनाते, उन्हें चकित करते हैं और उनका मनोरंजन करते हैं। माइंड रीडर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल जादूगर, नकुल शेनॉय आपको ऐसा करना सिखा सकते हैं। भारत के सबसे रोमांचक कलाकारों में से एक से जादू सीखिए स्मार्ट कोर्स इन मैजिक एक आसान और आसानी से उपलब्ध प्रभावी कोर्स है, जो हाथ की सफाई को उसी के अंदाज में, प्रदर्शन और प्रस्तुति के सिद्धांत को केंद्र में रखते हुए सिखाती है। आप चाहे जादू को अपना शौक बनाना चाहते हैं या पेशेवर कलाकार के रूप में अपने हुनर को तराशना, यह पुस्तक आपको सही दिशा में ले जाएगी।

Aap Bhi Ameer Ban Sakte Hain by Joseph Murphy

दौलत कुछ चुनिंदा लोगों का अधिकार नहीं, आपका भी जन्मसिद्ध अधिकार है। डॉ. जोसेफ मर्फी की इस विख्यात पुस्तक की सहायता से आप यह जान लेंगे कि उस अधिकार को वास्तविकता में कैसे बदलें। जीवन में सफलता की प्रेरक और सशक्त सच्ची घटनाओं से भरी यह पुस्तक आपको सच्ची दौलत के रहस्यों को खोलना और उस संपत्ति, सत्ता और समृद्धि का स्वाभाविक रूप से आनंद उठाना सिखाएगी, जिसके आप हकदार हैं। बस आपको डॉ. मर्फी की चिरपरिचित जमीनी, व्यावहारिक सलाहों पर चलना है, और आप यह जान लेंगे कि कैसे— उस चामत्कारिक शक्ति का उपयोग करें, जो आपको अमीर बनाती है। संपत्ति के अपने लक्ष्यों को कई गुना बढ़ाएँ और उन्हें तुरंत प्राप्त करें। अपने आप को धन-चुंबकत्व से कैसे आवेशित करें। जीवन भर के लिए अकूत धनसंग्रह की योजना कैसे बनाएँ। उस सारे धन का आनंद कैसे उठाएँ, जो आपको चारों ओर है। चाहे आप अपनी वर्तमान संपत्ति में कई गुना वृद्धि का प्रयास कर रहे हैं या अपने पहले बड़े मौके की तलाश में हैं, ‘आप भी अमीर बन सकते हैं’ आपको बेहिसाब दौलत की राह पर ले जानेवाली सीधी, असरदार तरकीबों को बताती है।

Aap Bhi Ias Ban Sakte Hain by Mukesh Kumar

IAS हमारे देश की सबसे प्रतिष्ठित और दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा में से एक है। माफ कीजिए, मैं कहना चाहूँगा कि यह परीक्षा एवरेस्ट फतेह से भी ज्यादा कठिन है; यही इस परीक्षा की खूबी भी है। इसके चयन के अग्निपथ जैसे तीन दौरों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार—से तपकर जो उम्मीदवार बाहर निकलता है, वह सच्चा हीरा होता है। इस परीक्षा में सफलता के लिए कोई सीधी एंट्री नहीं है। अगर आप प्रारंभिक परीक्षा में विफल हो जाते हैं या अंतिम परीक्षा साक्षात्कार में—आपको शुरुआत शून्य से ही, यानी प्रारंभिक परीक्षा से ही करनी होगी। कई बार पहले अवसर में ही साक्षात्कार तक को क्रेक कर लेनेवाले उम्मीदवार हो सकता है कि अगली बार प्रारंभिक परीक्षा में ही विफल होकर बाहर हो जाएँ। शॉर्टकट में यकीन रखनेवाले, अधीर व अगंभीर लोगों के लिए यह परीक्षा नहीं है। यह तो ऐसे लोगों की दरकार रखती है, जो चोटी बाँधकर अध्ययन में यकीन करते हों। व्यवस्थित, अनुशासित और दृढ संकल्प से ओत-प्रोत उम्मीदवार ही इसकी सफलता का स्वाद चख पाते हैं—आखिर देश को इन गुणों से पूरित अधिकारियों की ही आवश्यकता होती है। जिन उम्मीदवारों में उपर्युक्त गुणों का प्राचुर्य हो, यदि उन्हें सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वे निश्चित ही ढ्ढ्नस् क्रेक कर लेते हैं। इस पुस्तक को ऐसे ही योग्य और उपयुक्त उम्मीदवारों के लिए तैयार किया गया है। हमें उम्मीद ही नहीं, ठोस भरोसा है कि यह पुस्तक निश्चित ही ढ्ढ्नस् बनने के लिए सत्यनिष्ठ और कृत संकल्पित उम्मीदवारों के लिए उपयोगी मार्गदर्शक का कार्य करेगी।

Aap Safal Kaise Hon by Dr. Ashutosh Karnatak

जीवन में कौन सफल और विजयी होना नहीं चाहता। यह पुस्तक एक सफल उच्च पदस्थ प्रबंधक के व्यावहारिक अनुभव का निचोड़ है, जो आपको बताएगी कि सफल होने, विजय प्राप्त करने और जीवन में आगे बढ़ने के गुर क्या हैं। बानगी के लिए प्रस्तुत हैं कुछ सूत्र— • किसी भी अवरोध के पश्चात् यह आवश्यक है कि उस रुकावट का ब्योरा विस्तार से लिखें, क्योंकि लिखी बात को दिमाग अच्छी तरह से समझता है अपेक्षाकृत मौखिक विवरण के। • हमेशा किसी भी रुकावट का रास्ता निकालने के लिए पहले धैर्य से उसके बारे में सोचें, उसको विभिन्न टुकड़ों में तोड़ें तथा एक-एक कर उसको कार्यान्वित करें। • यदि कोई व्यक्ति रुकावट पेश कर रहा हो तो उसे Persue करके किसी भी तरह से negotiation स्तर तक लाएँ, ताकि वह अब आपकी बात सुन सके। • मन-ही-मन में यह प्रण लें कि आप किसी समस्या का कारण नहीं, अपितु समाधान का कारक बनेंगे। जीवन में कुछ कर दिखाने का दम-खम पैदा करने की शक्ति देनेवाले बिंदु, जो आपको एक सफल व्यक्ति बनने में सहायक सिद्ध होंगे।