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Tisara Sukh Tatha Anya Kahaniyan by Shailesh Matiyani

अंधा देख नहीं सकता। वह अंदर बढ़ गई, तब भी उसने नहीं देखा। जब उसने काँपते हुए हाथों से दरवाजा बंद कर दिया, तब चिल्लाया था—‘‘कौन है?’’ ‘‘मैं हूँ, लछमी भिखारिन...’’ एकाएक उसके मुँह से निकल पड़ा था और वह चौंकी थी। ‘‘कहाँ भीख माँगती थी? आज तक तो दिखी नहीं...’’ तो क्या यह अंधा देखता भी है? ‘‘नई-नई आई है क्या इस शहर में?’’ ‘‘हाँ...आँ!’’ उसकी आवाज कितनी बदल गई थी! उस शख्स के लिए भी तो वह बिलकुल नई-नई थी। ‘‘कोई बच्चा-वच्चा भी है?’’ ‘‘ऊँ हूँ...अभी तो मेरी शादी ही नहीं हुई है।...’’ ‘‘उमर क्या होगी तेरी?’’ —इसी संग्रह से हिंदी के बहुचर्चित कहानीकार शैलेश मटियानीजी ने इन कहानियों में पूँजीवादी समाज-व्यवस्था के शिकार शोषितों-पीडि़तों के दु:ख-दर्द को जीवंत एवं कारगर तरीके से उजागर किया है। अत्यंत मर्मस्पर्शी, संवेदनशीलता व पठनीयता से भरपूर कहानियाँ।

Titanic by Filson Young

I will not conceal his parts, nor his power, nor his comely proportion. His scales are his pride, shut up together as with a close seal. One is so near to another, that no air can come between them. They are joined one to another, they stick together, that they cannot be sundered. Out of his mouth go burning lamps, and sparks of fire leap out. Out of his nostrils goeth smoke, as out of a seething pot or caldron. His breath kindleth coals, and a flame goeth out of his mouth. The flakes of his flesh are joined together; they are firm in themselves; they cannot be moved.

Titian by S. L. Bensusan

TITIAN VECELLI, undeniably the greatest Venetian painter of the Renaissance, leaps into the full light of the movement. To be sure he appears full-grown, as Venus is said to have done when she appeared above the foam in the waters of Cythera, or Pallas Athene when she sprang from the brain of Zeus, but happily he was destined to live to a great age. We have few and scanty records to tell of the very early days. So wide was his circle of patrons in after life, so intimate his acquaintance with the leading men of his generation, that it is not difficult to find out what manner of man he was without the aid of his pictures, even though they have a very definite story to tell the painstaking student.

To Have and to Hold by Mary Johnston

THE work of the day being over, I sat down upon my doorstep, pipe in hand, to rest awhile in the cool of the evening. Death is not more still than is this Virginian land in the hour when the sun has sunk away, and it is black beneath the trees, and the stars brighten slowly and softly, one by one. The birds that sing all day have hushed, and the horned owls, the monster frogs, and that strange and ominous fowl (if fowl it be, and not, as some assert, a spirit damned) which we English call the whippoorwill, are yet silent. Later the wolf will howl and the panther scream, but now there is no sound. The winds are laid, and the restless leaves droop and are quiet. The low lap of the water among the reeds is like the breathing of one who sleeps in his watch beside the dead.

To Sir, With Love by E.R. Braithwaite

विश्वप्रसिद्ध कृति ‘टु सर, विद लव’ में लेखक ब्रेथवेट ने लिखा है कि अन्य कैरिबियन लोगों की तरह उनमें भी देश के लिए कुछ करने की इच्छा थी और इसी भावना से ओत-प्रोत होकर वे ब्रिटिश सशस्त्र बल में शामिल हुए और युद्ध के दिनों में देश के लिए मर-मिटने को तैयार हुए। ब्रेथवेट शिक्षक के तौर पर गहरी अभिरुचि का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि ऐसे कई सबक हैं, जो शिक्षकों को सीखने की जरूरत है, खासकर विनम्रता और धैर्य के संदर्भ में। यह बात कोई हैरानी पैदा नहीं करती कि असभ्य छात्र ही उन्हें सबक सिखाना शुरू करते हैं। इस बात का मर्मस्पर्शी चित्रण किया गया है, जब ऐसे ही एक बच्चे की माँ मर जाती है। वह बच्चा पूरी कक्षा में अकेला ही था, जो मिश्रित नस्ल का था। ‘टु सर, विद लव’ इस बारे में पाठकों के मन में कोई संशय नहीं छोड़ती कि सदियों से ब्रिटेन का समाज कैसा रहा है, किस तरह से पूर्वग्रहों से घिरा रहा है। ‘टु सर, विद लव’ हमें पचास के दशक के शुरुआत की याद दिलाती है, जब द्वितीय विश्वयुद्ध की तबाही के बाद ब्रिटेन के पुनर्निर्माण के लिए आने वाले हजारों अन्य लोगों की आसानी से पहचान की जा सकती थी और यहाँ सड़कों पर, कार्यस्थलों में और स्कूल-कॉलेजों में निर्विवाद आनुवंशिक पूर्वग्रह की गहराई से जमी समस्या उनका इंतजार कर रही थी। नस्लीय भेदभाव को दूर करने और समरसता का भाव जगानेवाली अत्यंत लोकप्रिय, भावुक एवं पठनीय पुस्तक।

To the Last Man by Zane Grey

Even to-day it is not possible to travel into the remote corners of the West without seeing the lives of people still affected by a fighting past. How can the truth be told about the pioneering of the West if the struggle, the fight, the blood be left out? It cannot be done. How can a novel be stirring and thrilling, as were those times, unless it be full of sensation? My long labors have been devoted to making stories resemble the times they depict. I have loved the West for its vastness, its contrast, its beauty and color and life, for its wildness and violence, and for the fact that I have seen how it developed great men and women who died unknown and unsung.

To the Lighthouse by  Virginia Woolf 

To the Lighthouse is a 1927 novel by Virginia Woolf. The novel centres on the Ramsay family and their visits to the Isle of Skye in Scotland between 1910 and 1920.

Together in Struggle by V. Suryanarayan

Jawaharlal Nehru and Sukarno were two of the greatest charismatic leaders of the twentieth century. They have left their indelible imprint on all aspects of contemporary India and Indonesia. This book graphically describes how the two countries became close allies in the momentous years of Indonesian Revolution (1945-1949). While the Indonesian nationalist triumvirate—Sukarno, Mohammad Hatta and Satan Sjahrir—have frequently acknowledged India’s seminal role in the cause of Indonesian independence, there is marked tendency among the Western scholars to downgrade India’s significant contribution. This path breaking book takes a balanced approach. It will be of interest to all those who are committed in promoting India’s relations with Indonesia. More so, when Indian leaders are trying to convert the Look East Policy into Act East Policy.

Tohafa Tatha Anya Charchit Kahaniyan by Amar Goswami

तोहफा तथा अन्य चर्चित कहानियाँ—अमर गोस्वामी अमर गोस्वामी की कहानियों में बार-बार एक अमानवीय ऊँचाई पर पहुँचकर त्रासदी और कौतुक के बीच का फेंस टूटकर बिखर जाता है और दर्द की चुभन से हम ठहाका लगाकर हँसते नजर आते हैं। सिर्फ कहानी में ही नहीं, किसी भी कला विधा में ऐसे शिल्प को पाना अत्यंत कठिन काम है। कथाकार का यह शिल्प न केवल उन्हें विशिष्‍ट बनाता है, बल्कि अपने युग के कथाकार होने की सार्थकता को भी चिह्न‌ित करता है। —अशोक भौमिक अमर गोस्वामी को मनुष्य के मन को परत-दर-परत पढऩे की शक्‍ति प्राप्‍त है और उनकी कलम कभी-कभी जादूगर का डंडा हो जाती है। वे कहानी कहते जाते हैं और आप उनके साथ बहते जाते हैं। —रवींद्रनाथ त्यागी अमर गोस्वामी की कहानियों में कहानी के पात्र नहीं, कथाकार का अनुभव बोलता है, जो हमारे समाज का ही अनुभव है। इन कहानियों को पढ़कर हम चौंकते नहीं, एक गहरा उच्छ्वास भर लेते हैं और होंठ जबरन तिरछे हो जाते हैं। हम अपनी मुसकान को लेखक की कटाक्ष भरी मुसकान से मिलाए रहते हैं और खत्म होने पर बुदबुदाते हैं—'मान गए गुरु, कहानी ऐसे भी लिखी जा सकती है।’ —राकेश मिश्र अमर गोस्वामी के पात्र व्यवस्था की माँग नहीं, बल्कि व्यवस्था की जड़ता पर गहरी चोट करते हैं और व्यवस्था के यथास्थितिवाद के प्रति उनमें एक गहरा आक्रोश है। वे सही मायने में विपक्ष की भूमिका निभाते हैं। —डॉ. प्रमोद सिन्हा अमर गोस्वामी समकालीन दौर के उन चंद कहानीकारों में से हैं, जिन्होंने अपना मुहावरा पा लिया है। —प्रकाश मनु हिंदी कहानी में जो सहज रूप से बहनेवाली किंचित् लोकप्रिय धारा है, उसमें अमर गोस्वामी का भी योगदान है। यदि हम लोकप्रियता को साहित्यिकता का शत्रु न मानें तो अमर गोस्वामी की कहानियों के महत्त्व को भी स्वीकार करना पड़ेगा। —वेदप्रकाश भारद्वाज

Tokara Bhara Prem by Alok Saxena

अचानक ही धन देवी लक्ष्मी जी गहरे संताप में आ गई कि कल तक उसका आस्तिक उपासक, जो 500 और 1000 रुपए के अविनाशी नोटों को अपनी तिजोरियों, अलमारियों यहाँ तक कि अपने डबलबेड के बॉक्स व गद्दों के नीचे सँभाल-सँभालकर रखता था, बेनागा प्रतिदिन उसके आगे अगरबत्ती और दीपक जलाकर उसकी पूजा भी किया करता था, आज अचानक नास्तिक हो गया है। नास्तिक ही नहीं, जल्लाद बन गया है और उसे गंदे, मटमैले-कुचैले थैलों में भर-भरकर घर से बेघर करने पर आमादा हो गया है। हैवानियत उसके सिर चढ़कर अपना काम कर रही है। वह वर्षों से प्यार से सँजोकर रखी हुई अपनी लक्ष्मी को रात के अँधेरे में नदी-नालों, गटर, कूड़ेदान व आस-पास की झाड़-झाडि़यों में फेंकने पर आमादा हो गया है। उसे आज अपनी सुख-समृद्धि का बिलकुल भी ध्यान नहीं है। इस समय उसके लिए सुख-समृद्धि जाए चूल्हे में या फिर कहीं भी जाए, उसकी बला से! उसे तो इस समय अपने वैभव से ज्यादा अपने घर की लक्ष्मी को गुप्त रूप से ठिकाने लगाने की चिंता है। वह पहले उसे पाने के लिए अपना दिन-रात एक करता था। रात में सोता अपनी पत्नी के साथ था, परंतु खयालों में उसे ही रखता था। रात में बिस्तर पर करवटें बदलता था तो अपने गद्दों के नीचे बिछाकर रखी हुई, अपनी धन-लक्ष्मी को जब तब झाँक-झाँककर भरपूर देख नहीं लेता, तब तक उसे नींद नहीं आती थी। —इसी संग्रह से

Told After Supper by Jerome K Jerome

"It was Christmas Eve. "I begin this way because it is the proper, orthodox, respectable way to begin, and I have been brought up in a proper, orthodox, respectable way, and taught to always do the proper, orthodox, respectable thing; and the habit clings to me. "Of course, as a mere matter of information it is quite unnecessary to mention the date at all. The experienced reader knows it was Christmas Eve, without my telling him. It always is Christmas Eve, in a ghost story, "Christmas Eve is the ghosts' great gala night. On Christmas Eve they hold their annual fete. On Christmas Eve everybody in Ghostland who IS anybody—or rather, speaking of ghosts, one should say, I suppose, every nobody who IS any nobody—comes out to show himself or herself, to see and to be seen, to promenade about and display their winding-sheets and grave-clothes to each other, to criticise one another's style, and sneer at one another's complexion." -Introduction

Tolstoy by Romain Rolland

Romain Rolland's biography of Tolstoy is both a tribute to its great subject and an assessment of his work. Rolland, who received the Nobel Prize for Literature in 1915, was profoundly affected by Tolstoy's writing and particularly concerned with Tolstoy's conceptions of art.

Tom and Some Other Girls: A Public School Story by Mrs. George de Horne Vaizey

A plaintive sob greeted his words from the neighbourhood of the sofa. For once in her life Mrs Chester’s kindly, good-tempered face had lost its smiles, and was puckered up into lines of distress. She let one fat, be-ringed hand drop to her side and wander restlessly over the satin skirt in search of a pocket. Presently out came a handkerchief, which was applied to each eye in turn, and came away bedewed with tears.

Tom Grogan by Francis Hopkinson Smith

The present fiction novel 'Tom Grogan' was written by Francis Hopkinson Smith. It was first published in the year 1896. It was the best selling book in the United States that year. Prior to its full fledged publication, it was also serialized in 'The Century Magazine' starting in December 1895.

Tom Sawyer Abroad by Mark Twain

Tom Sawyer Abroad is a novel by Mark Twain published in 1894. It features Tom Sawyer and Huckleberry Finn in a parody of adventure stories like those of Jules Verne.

Tom Sawyer, Detective by Mark Twain

Tom Sawyer, Detective is an 1896 novel by Mark Twain. It is a sequel to The Adventures of Tom Sawyer, Adventures of Huckleberry Finn, and Tom Sawyer Abroad. Tom Sawyer attempts to solve a mysterious murder in this burlesque of the immensely popular detective novels of the time.

Tom Slade with the Flying Corps: A Campfire Tale by Percy Keese Fitzhugh

The reports in the American newspapers of the loss of Tom Slade, aviator, were read by his many admirers and friends with a sense of shock and with feelings of personal bereavement.

Tom Swift and His Motor-Cycle; Or, Fun and Adventures on the Road by Victor Appleton

A classic adventure series by many writers including Stratemeyer Syndicate and his successors associated with Tom Swift. Tom Swift, in his first adventure, has purchased a motorcycle and immediately gets busy modifying it. Eager to test his enhancements, Tom volunteers to transport his father's revolutionary turbine design plans across the country roads to Albany. Unaware of the evil corporate investors who want to steal the invention for themselves, Tom falls into their trap and finds himself facing the greatest peril of his young life. It is up to Tom not only to retrieve the blueprints and turbine prototype, but also to bring a gang of hired thugs to justice.

Top 50 Global Brands by Pradeep Thakur

ब्रांड मूल्य (वैल्यू) वह परम मुद्रा (अल्टीमेट करेंसी) है, जिसके लिए कंपनियाँ तरसती हैं। मूल्यवान ब्रांड न केवल अपनी माँग को बढ़ाता है, बल्कि संबंधित कंपनी की ‘मूल्य-निर्धारण शक्ति’ (प्राइसिंग पावर) को भी। इस पुस्तक में सर्वाधिक लोकप्रिय अमेरिकी व्यावसायिक पत्रिका ‘फोर्ब्स’ द्वारा प्रतिवर्ष जारी की जानेवाली विश्व के 100 सबसे मूल्यवान ब्रांडों की सूची में से 50 श्रेष्ठतम ब्रांड को शामिल किया गया है। तुलनात्मक अध्ययन के लिए फोर्ब्स के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय विज्ञापन व जनसंपर्क प्रतिष्ठान ऑम्नीकॉम समूह की सहयोगी कंपनी इंटरब्रांड के वार्षिक मूल्यांकन का भी उल्लेख किया गया है। मई 2017 में जारी फोर्ब्स पत्रिका की नवीनतम सूची में 170 अरब डॉलर ब्रांड-मूल्य व 214.2 अरब डॉलर ब्रांड-राजस्व के साथ एप्पल लगातार सातवें वर्ष विश्व के सबसे मूल्यवान ब्रांड के स्थान पर बना हुआ था। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, फेसबुक, टोयोटा आदि के बारे में प्रामाणिक जानकारियाँ पाठकों को न केवल प्रेरित करेंगी, अपितु व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी उत्कृष्ट गुणवत्ता के आधार पर मार्किट में शीर्ष स्थान पाने के लिए उद्यत करेंगी।

Top-of-the-World Stories for Boys and Girls by Julius Krohn et al.

Not for my dear usual public of little children have I gathered these stories from Scandinavian authors, but for boys and girls who have reached a stage which warrants a rather free range in Story Land. For here are to be encountered creatures and events, deeds and ideas, unsuited to youngest readers, but which have legitimate attraction for boys and girls from nine to fourteen years old—the age varying according to the child's maturity and previous reading.

Topsy-Turvy by Jules Verne

“Then Mr Maston, you pretend that a woman has never been able to make mathematical or experimental-science progress?” “To my extreme regret, I am obliged to, Mrs. Scorbitt,” answered J.T. Maston. “That there have been some very remarkable women in mathematics, especially in Russia, I fully and willingly agree with you. But, with her cerebral conformation, she cannot become an Archimedes, much less a Newton.”

Tortoises by D H Lawrence

Some of Lawrence's most well-known poems are those that deal with the relationship between nature and man. All of the poems in this book revolve around a simple figure: the tortoise.

Totem and Taboo by Sigmund Freud

First published in the year 1913, in the present book, 'Totem and Taboo' by the father of psychoanalysis Sigmund Freud, the author applies psychoanalysis to the fields of archaeology, anthropology, and the study of religion. It is a collection of four essays inspired by the work of Wilhelm Wundt and Carl Jung.